जैविक खेती व्यवसाय कैसे शुरू करें: आप सभी को पता होना चाहिए

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कृषि उद्यम की शरुआत करना एक बहुत ही सराहनीय काम है। इसमें बढ़ते बाज़ार के साथ- साथ, कड़ी मेहनत भी है। इसलिए जैविक खेती एक ऐसा व्यवसाय है, जो ना केवल आपको ज्यादा लाभ देगा। बल्कि अपने प्रतियोगियों के साथ मुकाबलों मे भी आपको बढ़त हासिल दिलाएगा। आप जैविक खेती उद्यम की शुरुआत कैसे करें। इस बारें में समस्त जानकारी यहाँ प्रदान की जाएगी ।

भारत में जैविक खेती उद्योग (The Organic Farming Industry in India)

जैविक खेती का अर्थ है, रसायनों, कीटनाशकों और कृत्रिम उर्वरकों के बिना खेत में फसल को उगाना। इसमें फसल को उगाने के लिए पारंपरिक खाद्य से बने उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। जो किसी भी तरह से सेहत के लिए बिलकुल भी हानिकारक नहीं होते हैं। आज के समय में भारत में जैविक खाद्य बाजार का मूल्यांकन अब तक 815 मिलियन डॉलर से अधिक है। आगे आने वाले समय में इसके और अधिक बढ़ने की सम्भावना है।

जैसे–जैसे सेहत को सही रखने वाली खाने की चीजों के बारे में लोगों की जगरूकता बढ़ रही है। लोग ऐसे उत्पादों से दूर होते जा रहे हैं, जिनमें किसी भी प्रकार की मिलावट होती है।  इस हिसाब से देखा जाए, तो जैविक उत्पादो की मांग आगे आने वाले समय में आसमान छूने की उम्मीद है। भारत ने बीते छह सालो में जैविक बाज़ार के भावों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। वास्तव मे 2016 और 2017 के बीच के समय में जैविक खेती के लिए उपयोग की जानेवाली भूमि मे 20% की बढ़त हुई थी। इसके साथ ही, भारत पूरे विश्व में सबसे ज्यादा जैविक उत्पादो को पैदा करने वाला देश भी है। यहां दिए गये आकड़ें भारत मे तेजी से बढ़ रहे जैविक उद्योग के विकास का प्रमाण है।

जैविक खेती का भविष्य (The Future of Organic Farming )

जैसे- जैसे समय बीतता जा रहा है, कृषि से जुड़ी हुई नई तकनीके और सुविधाएं इसे और भी ज्यादा आसान बना रही है। आर्गेनिक फार्मिंग के नये तरीकों में हाइड्रोपॉनीक, एक्वापॉनीक, ग्रीनहाउस, वर्टिकल फार्मिंग आदि जैसी चीजे शामिल है। यहीं तकनीके और सुविधाएं कृषि उद्योग मे क्रांति ला रही है।

आधुनिक और ऑटोमेटिक मशीनों ने केवल काम करने की ताकत को सुधारा है, बल्कि उत्पादो की क्वालिटी को भी सुधारा है। आईएमएआरसी समूह के एक अनुमान के अनुसार, जैविक खाद्य उद्योग में 2021 से 2026 तक 24% की सीजीएएआर से बढ़ने की उम्मीद है। आर्गेनिक फार्मिंग बहुत ही तेजी से पूरी दुनिया मे प्रसिद्ध हो रही है। अब, जब कोविड-19 महामारी का प्रभाव कम हो रहा है,  तो यह उद्योग फिर से अपनी रफ्तार पकड़ रहा है। इस तरह से की जाने वाली जैविक खेती सभी पहलुओं मे लाभ ही देने वाली है। इसके साथ ही इसे एक से अधिक तरीको से भी किया जा सकता है।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर मूवमेंट्स (IFOAM) जैविक खेती के चार मख्यु सद्धांतो पर काम करती है:

1. स्वास्थ्य: जैविक खेती की वजह से मिट्टी कि गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके साथ ही यह पशुओं और इंसानों को भी सेहतमंद बनाए रखने में मदद करती है।

2. निष्पक्षता: खेती करने की यह पद्धति निष्पक्ष व्यापार और न्यायपूर्ण संबंधों पर बनी होनी चाहिए।

3. पारिस्थितिकी: जैविक खेती करते समय प्राकृतिक पारिस्थितिक चक्र और पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखना चाहिए।

4. देखभाल: जैविक खेती को अत्यधिक जिम्मेदारी और पर्यावरण की देखभाल के साथ अपनाना चाहिए।

जैविक खेती के प्रकार (Types of Organic Farming)

जैविक खेती दो प्रकार की होती है:

एकीकृत जैविक खेती (Integrated Organic Farming): एकीकृत जैविक खेती एक ऐसी विधि है, जिसमें एकीकृत कीट और पोषक तत्व का प्रबंधन शामिल है। यह प्राकृतिक और आर्थिक मांगों को पूरा करने के लिए की जाती है। इस विधि में ऊर्जा नवीनीकरण, जैविक कचरे का स्मार्ट उपयोग, और कई प्राकृतिक उपायों को लागू किया जाता है। इन तरीकों का उपयोग करके उगाई जाने वाली फसले, शद्धु जैविक खेती की तुलना मे थोड़ी कम खर्चीली होती है।

शुद्ध जैविक खेती (Pure Organic Farming): यह विधि जैविक फसल उगाने की सबसे शुद्ध और प्राकृतिक है। इसमें किसी भी तरह के कृत्रिम खाद या रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता है। इसकी जगह पर गाय के गोबर की खाद, जैविक कचरे, वर्मी कम्पोस्ट खाद  और प्राकृतिक पदार्थों से पैदा होने वाली दूसरी खाद का उपयोग किया जाता है। शद्धु जैविक खेती ना केवल उपज की गुणवत्ता को बढाती है। बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता में भी काफी सुधार करती है। इसके अलावा यह पर्यावरण  को भी बहुत कम नुकसान पहुचाती है।

 जैविक खेती के प्रमुख 5 तरीके (The 5 Methods of Organic Farming )

फसल चक्र (Crop Rotation): यह इंसानों द्वारा लम्बे समय में प्रयोग में लाई जाने वाली एक पुरानी तकनीक है। यह फसल चक्र हज़ारो सालो से चला आ रहा है। यह तकनीक फायदेमंद भी है। इस तकनीक से अलग अलग सीजन में अलग अलग प्रकार की फसलों की खेती की जाती है। साल में एक ही तरह की फसल को उगाने की जगह, किसान खेत में सीजन के अनुसार एक साथ एक से ज्यादा फसल उगाते हैं। यह भूमि के तनाव को कम करता है, उपज को बनाए रखता है और लचीले कीटो को बनने से रोकता है।

मिट्टी प्रबंधन (Soil Management) : यह ऑर्गेनिक फार्मिंग का एक बहुत ही प्रमुख हिस्सा है। कुछ समय बाद, मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है। इसलिए, मिट्टी में पोषण बनाए रखने के लिए, प्राकृतिक खाद जैसे पुआल (भूसा), हड्डियों का चूरा या प्राकृतिक खाद डालनी चाहिए। ये चीजें मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारती है, इससे पैदावार भी अच्छी होती है।

खरपतवार प्रबंधन (Weed Management) : खेतो मे अनचाहे पौधे उग आते हैं। जिन्हें खरपतवार कहा जाता है। इन्हें रोकने के लिए, किसान मिट्टी को गीली घास से ढक देते है, और घास की कटाई करते है। इसे पलवार करना या घास – पात से ढकना कहा जाता है।  इस विधि में पुआल, खाद या पौधों के गले – सड़े हिस्सों को मिट्टी के ऊपर डाला जाता है। जिस वजह से खरपतवार में बढ़ोतरी नहीं होती है। एक और दूसरा तरीका भी है, जिससे हम घास – फूस की वृद्धि को रोक सकते है। इसमें हमें अनचाही खरपतवार की समय-समय पर कटाई करनी होती है।

खाद (Compost) : – जैविक खेती के लिए पौधों को प्रयाप्त मात्रा मे पोषक तत्व प्रदान करना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। प्राकृतिक सामग्रियां जैसे की जैविक खाद, गाय की खाद, वर्मीकम्पोस्ट, आदि जैविक खेती के लिए उपयोग की जाती है। जैविक खेती करने वाले किसानों को पौधों के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पूरे साल तक कृत्रिम खाद की जरूरत नहीं पड़ती है।

कीटों का प्रबंधन (Pest Management) : जैविक खेती में कीटों का प्रबंधन करना बहुत ही जरूरी होता है क्योंकि कीट जैविक खेती में बाधा पैदा करते है।  जैविक खेती में कीटों को मारने के लिए किसी भी तरह के रसायनों का प्रयोग नहीं होता है। कीटों को मारने के लिए जैविक खेती में कम से कम रसायनों के साथ जड़ी-बूटियों और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। यह न केवल कीटों के प्रकोप को रोकता है बल्कि पौधों के स्वास्थ्य की भी रक्षा करता है।

जैविक खेती के अनगिनत लाभ (Benefits of Organic Farming)

·         जैविक खेती में केवल प्राकृतिक और रासायनिक मुक्त सामग्री का उपयोग किया जाता है। इस वजह से जैविक खेती के लाभों का आकलन करना भी काफी सरल हो जाता है।

·         इसका मतलब यह है कि, जैविक खेती द्वारा उगाए जाने वाले सभी उत्पादों की गुणवत्ता बहुत ही अच्छी होती है। और इसमें किसी भी प्रकार से हानि पहुंचाने वाले तत्व नहीं होते है। जैविक तरीके से उगे हुए फलों का स्वाद सामान्य तौर पर दूसरे तरीके से उगाए जाने वाले फलों से बहुत ही ज्यादा अच्छा होता है।

·         जब इस खेती में किसी भी प्रकार के हानिकारक रासायनो का उपयोग नहीं होता है, तो इसका किसी भी प्रकार का नकारत्मक प्रभाव हमारे पर्यावरण पर भी नहीं पड़ता है। जैविक खेती एक बड़े पैमाने पर रोजगार देने के लिए भी जिम्मेदार है, और इससे हमारे समाज को भी बहुत लाभ हो रहा है।

जैविक खेती के लिए व्यावसायिक योजना बनाना (Creating an Organic Farming Business Plan)

आपके व्यापार की वित्तीय व्यवहार्यता और स्पष्टता को समझने के लिए एक व्यवसाय योजना बहुत ही जरूरी है। जब किसी व्यावसायिक विचार का एक योजना के रूप में खाका तैयार किया जाता है, तो इससे हमें अपने प्लान में सफलता की दर, कमियां और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करना आसान हो जाता है। आप कह सकते हैं कि एक बिज़नेस प्लान कहा पर कितना निवेश करना है,  कितनी धनराशि लगानी है। उसमे भी मदद करता है। इसलिए, एक सफल जैविक खेती के व्यापार को शुरू करने के लिए, जरूरी है कि उसकी एक व्यावसायिक योजना बनाई जाए।

बाज़ार अनुसन्धान (Market Research )

बाज़ार को अच्छे से समझना उस पर रिसर्च करना आपके व्यावसायिक योजना का पहला कदम है। हालाकिं जैविक खेती आज के समय में बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध होती जा रही है, इसके साथ ही कुछ उद्योगों मे जैविक उत्पादों की मांग भी बढ़ गयी है। उदाहरण के तौर पर, रेस्टोरेन्ट्स, खाना बनाने वाली जगह, पीने की चीज़े बनाने वाली कंपनियाँ और ग्लोबल सुपरमार्केट चेन आदि सभी जगहों पर सामान्य उपभोक्ताओं की तुलना मे जैविक उत्पादों की बहुत ही ज्यादा मांग है। यही वजह है की अपने लक्षित खरीदारो को पहचानना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। यही सब बातें व्यावसायिक योजना को अंतिम रूप देने में मदद करती है । यह बातें निश्चित करती है, कि आपको कौन सी फसल उगानी है या, और कैसे आप अपनी तैयार फसल को बाज़ार मे बेचेंगे।

मार्केट रिसर्च में आपका अगला महत्वपूर्ण कदम यह होगा की आप अपने साथ मुकाबला करने वालो को जाने । आपको यह जानना होगा ही आपके साथ मुकाबला करने वालो ने किस प्रकार की फसल उगाई है, और उन्होंने उस फसल को बेचने के लिए क्या मूल्य तय किया है। उनका मार्केटिंग मॉडल क्या है। कहने का मतलब है की उन्होंने अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए किस प्रकार की मार्केटिंग स्ट्रेजी को अपनाया है।

इस जानकारी को इस्तेमाल करके, आप उनकी ताकत और कमजोरियों से बहुत कुछ सीख जाओगे। इससे आपको यह भी समझ आएगा, कि आपको अपनी योजना में क्या शामिल करना है और क्या नहीं।

व्यापार खोलने से पहले कुछ समय लीजिए। और आप खुद बाहर जाकर उद्योगों का सर्वे करिए । आप ऐसे कंपनियों के सामान रखने वाले लोगों के पास जाए और व्यापार करने वालो से मिले और उनकी मांगों को समझें। जैविक उत्पाद का प्रयोग करने वाले ग्राहक जो चाहते हैं, उन सब बातों को समझे। उसे अपने उत्पाद में जोड़े। यह व्यापार को आगे ले जाने के लिए बहुत बड़ा बड़ा कारक सिद्ध होगा।

एक बार जब आप सारे रिसर्च कर लेंगे, आपको अपने बिजनेस की ताकत और कमजोरियों को जानने के लिए  एक स्वोट (SWOT) विश्लेषण करना होगा। इससे आपको यह जानने में मदद मिलेगी की, कहा पर क्या सुधार करने की जरूरत है।

मजबूत व्यावसायिक लक्ष्यों को बनाना (Create Strong Business Goals)

व्यावसायिक लक्ष्य और उद्देशय वे होते हैं, जो एक संभावित निवेशक अपने मार्केट रिसर्च के पहले ही तैयार कर लेता है। उसे यह चीज बहुत अच्छे से पता होती है, कि उसके  मुख्य लक्ष्य और उद्देश्य क्या है।  जब आप अपने व्यावसायिक लक्ष्यों को अच्छी तरह से परिभाषित कर लोगे, तो यह आपके व्यापार के एक निर्णायक कारकों में से एक हो सकता है। आप अपने बिज़नेस में क्या चाहते हैं? क्या आप कोई विदेशी खाने की चीज़ बाजार में लेकर आना चाहते है? क्या आप खुद को एफएमसीजी ( FMCG)  इंडस्ट्री मे बड़ें नाम के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।  मूलरूप से आप अपने प्रोडक्ट को बेचने की दर को स्पष्ट रूप से परिभाषित करे। इस प्रकार आप होने लक्ष्य को आसानी से पा लेंगे।

अपने व्यापार के बारे मे एक छोटा सा सारांश दे:  आपका बिज़नेस किस चीज का है? यह कैसे चलेगा, इसकी जगह कहा होगी, आदि का एक छोटा सा सारांश अपने बिजनेस प्लान में जरूर डाले। उदाहरण के लिए, अगर आपने जैविक खेती में प्रमाणित कोर्स किया है, तो आप यह दिखाओ की वो आपको जैविक खेती में और व्यापार में कैसे मदद कर रहा है। यदि आपने किसी प्रसिद्ध परामर्श एजेंसी को काम दिया और तो इससे आपको पेशेवर सहायता भी मिल सकती है। सेटअप से लेकर शुरुआती महीनों तक, यह बताये की आपका फार्म कैसे काम करेगा। आप निधियों की भुगतान संरचना और लम्बे समय के लक्ष्यों की रूपरेखा तैयार करें। संक्षिप्त रूप में कहें कि आपके बिज़नेस के बारे में पढ़ने वाले को आपकी योजना की एक गहरी लेकिन सीमित जानकारी दी जाये।

वित्तीय योजना (Financial Planning)

आर्थिक योजना आपके व्यापार का सबसे मजबूत हिस्सा होती है। स्मार्ट वित्तीय योजना आपके जैविक खेती के व्यवसाय को शुरुआत के साथ मदद कर सकती है। इस खंड का मुख्य उद्देश्य आपके व्यवसाय की वित्तीय व्यवहारिकता को सही तरीके से स्थापित करना है। इसकी शुरुआत आप अपनी स्टार्टअप लागतों को परिभाषित करके शुरू करें। यह वह चीज है, जहां आप उपकरण, भूमि, मशीनरी, कार्यबल, उपयोगिता किराया, विपणन बजट, आदि पर खर्च होने वाले पैसों की लागत का खांका तैयार करते हैं।

अगला, कदम आपका अपने प्रोडक्ट को बेचने की दर पर काम करने वाला होगा। ये वो जगह है, जहा आप अपने शुरूआती बाज़ार अनुसन्धान और कनेक्शन का उपयोग कर सकते है। यदि आपने अपने प्रोडक्ट को पहले से कहीं भी बेचा हुआ है, तो आपके पास पहले से ही कुछ संभावित ग्राहक होंगे। आपको हमेशा आने वाले 1 से 2  सालो के लिए बेचे जाने वाले प्रोडक्ट के बारे में पहले से अनुमान लगाकर रखना होगा। यह अपने प्लान में बताना भी होगा। अपने लक्षित ग्राहकों की संख्या के आधार पर प्रोडक्ट की मांग को परिभाषित करे, और उसी के आधार पर अपने प्रोडक्ट के मूल्य को निर्धारित करे।

बाज़ार मिश्रण (Marketing Mix)

अंत में, इस कदम की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। आपके उत्पाद की मार्केटिंग और ब्रांडिंग से बिज़नेस में बहुत ज्यादा फर्क आ सकता है। यह एक ऐसी जगह है, जहा पर आपको यह पहचानने की जरूरत है, कि किस तरह के मार्केटिंग प्लान आपके बिजनेस के लिए अच्छे से काम कर सकते है। जैविक उत्पाद को आसानी से बाज़ार मिल जाता है। बशर्ते आपको अपनी USP पता हो। आप अपने प्रोडक्ट की कुछ ऐसी बातों के बारे मे बताए जो आपके उत्पाद को बाकियों से अलग बनाती हो। इससे आपको अपने लक्षित दर्शकों के अनुसार एक मजबूत मार्केटिंग पिच बनाने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही, आप अपने बेचे हुए प्रोडक्ट को कलमबद्ध करे। इसके बाद  आपको यह भी तय करना होगा की आपको अपने प्रोडक्ट का प्रचार ऑफलाइन करना है या ऑनलाइन। आप एक हाइब्रिड मार्केटिंग प्लान के विकल्प को भी चुन सकते है, जिसमें ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीके आते हैं। सेमिनार मे भाग लेना, फूड फेस्टिवल्स में भाग लेना, और उत्पादों की प्रदर्शनी लगाना आपके व्यवसाय को एक्सपोज़र हासिल करने और अंततः ग्राहक आधार बनाने मे मदद कर सकता है। ज्यादा जानकारी के लिए आप इस व्यवसाय योजना टेम्पलेट का ( सन्दर्भ ) सहारा ले सकते है।

जैविक खेती की सीमाएं (Limitations of Organic Farming )

हालांकि जैविक खेती में नुकसान कम और लाभ ज्यादा है, फिर भी हम इसके नुकसानों को अनदेखा नहीं कर सकते हैं। जैविक खेती की कुछ सीमाएं है, जो इस प्रकार है:

कम उत्पादन (Low Output): पारम्परिक तरह से खेती करने वाले किसान फसल को बढ़ाने के लिए  रेगुलेटर का उपयोग करते है, जिससे की पौधों कि वृद्धि की गति अचानक से बढ़ाई जा सके, और उत्पादन को भी बढ़ाया जा सके। लेकिन जैविक खेती में विकास की प्रक्रिया पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर रहती है। इसलिए, फसल का उत्पादन समय लेता है और नियमित खेती की तुलना मे कम होता है।

उच्च मूल्य (Higher Price) : चूँकि जैविक उत्पाद तैयार होने मे काफी समय लेते है, इसलिए इनका मूल्य ज्यादा होता है। इसलिए, सभी ग्राहक जैविक उत्पादों को खरीदने की इच्छा नहीं रखते हैं। आर्गेनिक प्रोडक्ट को हर वर्ग का व्यक्ति आसानी से नहीं खरीद सकता है।

शेल्फ लाइफ (Shelf Life): जैविक उत्पाद शुद्ध होते है और उसमें किसी भी प्रकार के रसायन को नहीं मिलाया जाता। इसकी वजह से उनकी शेल्फ लाइफ छोटी होती है। यह उत्पाद ज्यादा समय तक रखें नहीं जा सकते हैं। यह एक बहुत बड़ी समस्या इन प्रोडक्ट के साथ होती है।

भारत में सफल जैविक फार्म (Successful Organic Farms in India)

यहां पर कुछ सफलता की कहानियां है जो भारत में जैविक खेती के व्यापार आगे ले जाने में मदद करती है।

बैक 2 बेसिक (Back2basics): यह बैंगलोर का एक सरल जैविक फार्म स्टार्टअप है। यह एस मधुभूषण द्वारा 2015 मे शुरु किया गया था। इस आर्गेनिक फार्म की चेन बैंगलोर मे 200 एकड़ से ज्यादा जगह में फैली है। यह कंपनी 90 तरह से ज्यादा मौसमी फलो को और सब्जियों को उगाते हैं। यह मौसमी फल और सब्जियां देश के दूसरे हिस्सों में भी बेचे जाते हैं।

ग्रोइंग ग्रीन (Growing Greens): यह भी एक स्टार्टअप है, जो धीरे-धीरे चमक रहा है। यह स्टार्टअप एक इनफ़ोसिस के एक कर्मचारी द्वारा बनाया बनाया गया है, यह छोटा सा टेरेस फार्म 2012 मे शुरु किया गया था । अब यह फार्म 4 एकड़ में फैल चुका है। यह फार्म बहुत अलग – अलग तरह के छोटे छोटे जैविक साग पैदा करता है। इससे पता चलता है, कि आपको हमेशा बड़ी शुरुआत करने की जरूरत नहीं है, किसी भी काम की शुरुआत छोटे कदमो से भी हो सकती होती है।

 जैविक खेती के लिए सरकारी योजनाएं (Government Schemes for Organic Farming)

खेती को बढावा देने के लिए भारत सरकार हमेशा नयी योजनाएं लेकर आती है। इसके साथ ही सरकार द्वारा सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। यही कारण है कि खेती करने के लिए दिए जाने वाले लोन पर ब्याज दर में भारी छूट मिलती है। जिससे खेती को बढ़ावा मिले।

परंपरागत कृषि विकास योजना Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY) :  यह एक ऐसी स्कीम है, जो भारत में जैविक और सस्टेनेबल फार्मिंग के विकास पर कार्य करती है। “इस योजना के अन्तर्गत हर 3 साल के लिए किसान को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद दी जाती है, इस मूल का 62% यानी 31,000 रुपये किसान को इंसेंटिव दिया जाता है। जिसका प्रयोग किसान खेती के विकास में कर सकता है।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना ( Rashtriya Krishi Vikas Yojana): यह योजना जैविक खेती के लिए एक और प्रोत्साहन आधारित योजना है, जिसे 2007 में शुरू किया गया था। यह योजना राज्य के जैविक खेती करने वाले किसानों को सहायता प्रदान करती है। यह देश में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई गई योजना है।

जैविक उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Program for Organic Production -NPOP): यह भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी जैविक प्रमाणन योजनाओं में से एक है। इसकी शुरुआत 2001 में की गई थी।  इस योजना का उद्देश्य बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों का उत्पादन करना और लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना है।

जैविक खेती के लिए संसाधन (Resources on Organic Farming)

 नीचे कुछ संसाधनों के बारे में बताया गया है, जो आपको जैविक खेती के व्यापार के बारे में जानने में मदद करेंगे।

किताबें (Books)

1. द वन-स्ट्रॉ रेवोल्यूशन: एन इंट्रोडक्शन टू नेचुरल फार्मिंग बाय मसानोबु फुकुओका (The One-Straw Revolution: An Introduction to Natural Farming by Masanobu Fukuoka)। (लिंक )

2. जेसी ब्लूक और डेव बोहेनलिन द्वारा लिखित  प्रैक्टिकल पर्माकल्चर (Practical Permaculture by Jessie Blook and Dave Boehnlein) (लिंक)

3. ब्रायन ओ’हारा द्वारा नो-टिल इंटेंसिव वेजिटेबल कल्चर (No-Till Intensive Vegetable Culture by Bryan O’Hara )।  (लिंक )

पाठ्यक्रम (Courses)

भारत में जैविक  खेती और अन्य प्रकार की खेती से जुड़े कोर्सेज की बिल्कुल भी कमी नहीं है, परंतु यह विषय खास कर खेती से जुड़े होने के कारण आती विशिष्ट है, इसलिए अच्छा होगा जैविक खेती से जुड़ा हुआ व्यापार करने से पहले कोई डिग्री या सर्टिफिकेट वाला कोर्स कर लें। उसके बाद ही अपना हाथ जैविक खेती में आजमाए।  आप आर्गेनिक फार्मिंग में डिप्लोमा, स्नातक या मास्टर किसी भी प्रकार की डिग्री के लिए आवेदन कर सकते हैं। नहीं तो यहां दी गई लिंक द्वारा आप कोई भी कम अवधि वाला कोर्स चुन सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

जैविक कृषि आगे आने वाले समय में खेती का भविष्य बनकर उभरने वाली है। हमारे चारो तरफ अब जैविक उत्पादों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ती जा रही है। जनसंख्या के बढ़ने के साथ – साथ बाज़ार का आकार भी दुगना होता जा रहा है। इसलिए, आगे आने वाले समय में जैविक खेती  का बिज़नेस बहुत मुनाफा देने वाला और लम्बे समय तक चलने वाला व्यापार बन सकता है। यदि आप इसमें गुणवत्ता का ध्यान रखते हैं, तो यह लोगों को हमेशा आपके प्रोडक्ट की ओर खींचेगा। 

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