हाइड्रोपोनिक खेती व्यवसाय: संपूर्ण गाइड 2021

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जब हम किसी भी प्रकार की पारंपरिक खेती करते हैं, उसके लिए हमें बहुत अधिक जमीन की जरूरत होती है। इसके अलावा हमें कई तरह के निवेश और संसाधनों की भी आवश्यकता होती है। अब हर कोई इतना नहीं कर सकता। हाल के कुछ वर्षों में एक इजरायली कृषि तकनीक कृषि उद्योग में क्रांति ला रही है। यह तकनीक हाइड्रोपोनिक खेती के रूप में जानी जाती है। इस तकनीक में कम पानी और कम जमीन का उपयोग किया जाता है। कमाल की बात यह है कि इसे कहीं भी कर सकते हैं।  हाइड्रोपोनिक खेती का बिज़नेस शुरू करने के लिए यहां दी गई मार्गदर्शिका आपको इसके मूल सिद्धांतों को समझने और बिज़नेस प्लान बनाने में मदद करेगी।

हाइड्रोपोनिक खेती क्या है? (What Is Hydroponic Farming)

हाइड्रोपोनिक खेती बिना मिट्टी के खेती करने की एक कृषि पद्धति है। इसकी शुरुआत सबसे पहले इजराइल में हुई थी। हाइड्रोपोनिक खेती की मूल अवधारणा यह है कि आप मिट्टी के बजाय सीधे पोषक तत्वों से भरपूर पानी की मदद से फसल को उगा सकते हैं। हाइड्रोपोनिक्स खेती को आप तापमान नियंत्रित करने वाले वातावरण जैसे ग्रीनहाउस या इंडोर वर्टिकल फार्म में कर सकते हैं।

हाइड्रोपोनिक्स का उपयोग करके उगाए गए फल और सब्जियां प्राकृतिक रूप से जैविक और बेहतर गुणवत्ता वाली होती हैं।

चूंकि इस खेती में हम तापमान नियंत्रित कर सकते हैं। इस वजह से इसमें पानी भी बहुत ही कम मात्रा में लगता है। इसके अतिरिक्त, एनएफटी जैसी हाइड्रोपोनिक तकनीकों के द्वारा, पौधों को पाइप में बहते पानी के साथ उगाया जाता है। इस वजह से हमें कम जगह की भी जरूरत होती है।  इस वजह से यह फसलों की एक ऊर्ध्वाधर सारणी बनाने में सक्षम होता है। फसल के लिए जो भी जरूरी  सूक्ष्म और स्थूल पोषक तत्व चाहिए होते हैं, वो आसानी से पानी में घोल दिए जाते हैं। फिर इस पानी को 24/7 पौधों की जड़ों के पाइप के माध्यम से भेजा जाता है। इससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं और स्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा इसमें इनडोर फार्म ग्रो लाइट्स का उपयोग भी किया जाता है। जिसकी वजह से पूरे दिन पौधों को उनके अनुरूप वातावरण मिलता है।

भारत में हाइड्रोपोनिक खेती का भविष्य (The Future of Hydroponic Farming in India)

हाइड्रोपोनिक खेती की अवधारणा भारत में नई है। हालांकि, कई कंपनियां  इसका प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। इसके साथ ही हाइड्रोपोनिक्स खेती में प्रयोग होने वाले सेटअप को भी पूरी तरह से प्रदान करती है। खेती की इस पद्धति को भविष्य की खेती के रूप में भी देखा जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक तेजी से बढ़ते औद्योगीकरण और बढ़ती जनसंख्या के कारण पारंपरिक खेती के तरीके ज्यादा लम्बे समय तक नहीं चल पा रहे हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो,  हाइड्रोपोनिक्स खेती शहरी परिदृश्य में पूरी तरह फिट बैठती है।

2027 तक हाइड्रोपोनिक्स का बाजार लगभग 13।53% बढ़ने की उम्मीद है। अभी भारत लगभग 85% विदेशी सब्जियों का आयात करता है। मिट्टी रहित खेती के माध्यम से विदेशी सब्जियों का आयात में बदलाव होने की बहुत बड़ी संभावना है। उदाहरण के लिए, 9-10 टन मिट्टी आधारित खेती की तुलना में हाइड्रोपोनिक खेती प्रति वर्ष 300-400 टन सलाद का उत्पादन कर सकती है।

हाइड्रोपोनिक खेती क्यों चुनें? (Why Choose Hydroponic Farming)

हाइड्रोपोनिक्स खेती का एक आधुनिक तरीका है। इसमें प्रौद्योगिकी का प्रयोग होता है, जिसकी वजह से इसके परिणाम बहुत ही शानदार निकल कर आते हैं। इस पद्धति के सबसे प्रमुख फायदे और नुकसान यहां बताए जा रहे हैं :

हाइड्रोपोनिक्स खेती के लाभ

1.   उच्च गुणवत्ता वाली उपज: हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से उगाए गए पौधे जैविक होते हैं। चूंकि इसमें कोई मिट्टी शामिल नहीं है, जिसकी वजह से इसमें किसी भी प्रकार के कीट और रोग नहीं लगते हैं। इसकी जड़ें सीधे पोषक तत्वों से भरपूर पानी के संपर्क में आती है। जिसकी वजह से इसकी उपज की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

2.   कम जमीन का उपयोग: हाइड्रोपोनिक खेती के लिए हमें  मिट्टी आधारित खेती की तुलना में आधे से भी कम जमीन की जरूरत होती है। ऊर्ध्वाधर खेती के तरीके को अपनाकर हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के द्वारा इसे एक छोटे से 30 x 40 वर्ग फुट की जगह में भी किया जा सकता है।

3.   कम पानी का उपयोग: हाइड्रोपोनिक्स तकनीक द्वारा खेती में पानी,  मिट्टी आधारित खेती में प्रयोग होने वाले पानी की तुलना में 1/10 भाग का ही उपयोग करता है। पानी को एक क्लोज्ड-लूप सिस्टम के द्वारा पौधों को दिया जाता है, जो वाष्पीकरण और मौसम परिवर्तन के कारण पानी का ज्यादा उपयोग नहीं होने देता है।

4.   तेजी से उत्पादन: खेती की इस पद्धति में, फसलों को किसी भी प्रकार के प्राकृतिक मौसम, पानी, कीट या किसी अन्य बाहरी कारकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। इस वजह से ये बहुत तेजी से उपज पैदा करते हैं।

हाइड्रोपोनिक्स खेती के नुकसान

1.   सीखने में कठिनाई : हाइड्रोपोनिक्स खेती करने का तरीका बिल्कुल नया है। इसलिए इसकी जटिल तकनीक को पूरी तरह से समझने के लिए आपको सर्टिफिकेशन कोर्स करने की जरूरत होगी। यह कई लोगों के लिए एक प्रकार की चुनौती भी हो सकती है।

2.   पुरे तरीके से बिजली पर निर्भर:  हाइड्रोपोनिक्स खेती में पानी को चौबीस घंटे पानी पौधों को देना होता है। इस वजह से यह खेती पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। आधे घंटे की भी बिजली कटौती आपकी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है या नष्ट कर सकती है।

3.   बाजार की कमी : हाइड्रोपोनिक्स उत्पाद का बाजार बहुत ही ख़ास है। हालाकिं यह उपज पूरी तरह से जैविक है, इसलिए इसके उत्पाद की कीमत भी अधिक है। इसके अतिरिक्त, लेट्यूस और चेरी टमाटर जैसी सब्जियों की खपत भारत में सिमित ग्राहकों तक ही है।

4.   ज्यादा लागत: इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, कि इसकी लागत ज्यादा है। क्योंकि हाइड्रोपोनिक खेती के लिए बहुत सारे उपकरणों की आवश्यकता होती है। ग्रीनहाउस, पानी की टंकियां, जनरेटर या पावर बैकअप, वाटर चैनल आदि चीजों को स्थापित करना मंहगा होता है। आप जितने ज्यादा बड़े फ़ार्म का चुनाव करेंगे, इसकी स्थापना लागत उतनी ही अधिक होगी। छोटे पैमाने पर फार्म शुरू करना संभव है, लेकिन इसमें भी फार्म के आरओआई  महत्वपूर्ण रूप से बढ़ ही जाता है।

हाइड्रोपोनिक सिस्टम के प्रकार (Types of Hydroponic systems)

हाइड्रोपोनिक सिस्टम के मुख्य रूप से छह प्रकार हैं:

विक सिस्टम

विक सिस्टम हाइड्रोपोनिक्स का सबसे बुनियादी प्रकार है, जिसे कोई भी कहीं भी लगा सकता है। इसमें मोटर या पंप की आवश्यकता नहीं होती है। इसमें पौधों तक पोषक तत्वों को पहुंचाने के लिए नायलॉन की बत्ती का उपयोग करता है। यही वजह यह प्रणाली काफी सरल है। लोग आसानी से इसका प्रयोग कर सकते हैं। इस तकनीक में पौधों किसी एक उपजाऊ चीज में रखा जाता है, जैसे नारियल के कॉयर या एक्सपैंडेड क्ले। अब एक स्पंजी रस्सी या नायलॉन की बाती को पौधे के चारों ओर लपेटा जाता है। उसके बाद पोषक तत्वों से के घोल में को बाती के द्वारा पौधों को दिया जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो इस तकनीक में दो परतों में काम होता है। नीचे की परत में पानी में ऑक्सीजन को मिक्स किया जाता है। फिर उसे ऊपर की परत पर विक के द्वारा भेजा जाता है।

डीप वाटर कल्चर (डीडब्ल्यूसी)

डीप वाटर कल्चर एक पुरानी और क्लासिक हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली है। इस प्रणाली में जड़ों को पोषक तत्वों से भरे हुए  पानी के टब में डुबोया जाता है। टैंक में हवा का सर्कुलेशन सही तरीके से बना रहे, इसके लिए इस टैंक में  एक वायु पंप स्थापित किया जाता है। जैसा की आपने एक्वेरियम में देखा है। यह जड़ों को आवश्यक पोषक तत्व देते हुए ऑक्सीजन के आदान-प्रदान में मदद करता है। इस तकनीक के द्वारा हम एक ही ग्रो टैंक में कई पौधे उगा सकते हैं।

न्यूट्रिएंट फिल्म तकनीक ( एनएफटी )

न्यूट्रिएंट-फिल्म तकनीक हाइड्रोपोनिक्स की एक नई और उन्नत विधि है। एनएफटी तकनीक में पौधे की जड़ें पोषक तत्व से भरी हुई पानी की एक पतली सी फिल्म के संपर्क में आती हैं। पौधे की जड़ों को एक लंबी ट्यूबलर ग्रो टैंक के माध्यम से पानी पौधों की जड़ों को छूता हुआ लगातार आगे बढ़ता रहता है। जिससे पौधे की जड़े लगातार पानी के बहाव से पोषक तत्वों को अवशोषित करती रहती है।  करने की अनुमति देता है। चूंकि जड़ें पानी में नहीं डूबती हैं, इसलिए यह वातन की समस्या को भी हल करती है।

एरोपोनिक सिस्टम

एरोपोनिक्स दुनिया की सबसे उन्नत हाइड्रोपोनिक प्रणाली है। यह विभिन्न प्रकार की तकनीकों के कुछ-कुछ हिस्सों को प्रयोग करके उन्हें खेती की एक सरल विधि से जोड़ता है। एरोपोनिक्स सिस्टम में, हवा में फसल उगाने का प्राथमिकता दी जाती है। इसमें एक ग्रो टैंक में,  पौधों की जड़ें हवा में लटकी रहती हैं।  खनिज और तत्वों से बने हुए घोल को पंप के द्वारा पौधे की जड़ों पर छिड़का जाता है।  ऐसा करने से पानी, खनिज और हवा तीनो चीजें पौधों को मिलती रहती है। इस तकनीक में पानी की बर्बादी भी बहुत कम होती है। पौधों की जड़े भी आसानी से हवा के सम्पर्क में रहती है। एरोपोनिक्स तकनीक का प्रयोग करने से लागत भी कम आती है।

ड्रिप सिस्टम

ड्रिप सिस्टम आज के समय में बहुत लोकप्रिय हो गया है। यह बड़े पौधों को उगाने के लिए भी उपयोगी है। ड्रिप सिस्टम पारंपरिक ड्रिप सिंचाई के समान है। आप नारियल कॉयर जैसे पानी को सोखने वाली चीजों में पौधों को डालें और प्रत्येक पौधे पर सीधे पानी की ड्रिप चलाएँ। पोषक तत्वों से भरे हुए पानी को ड्रिप या स्प्रिंकलर के द्वारा पौधों को प्रदान किया जाता है। यह प्रणाली विक सिस्टम का ही एक उन्नत रूप है।

ईबीबी और फ्लो सिस्टम

ईबीबी तकनीक बिजली, पानी बचाने और  पौधों की जड़ों को ऑक्सीजन प्रदान करने का एक सरल तरीका है। इस प्रणाली में, पोषक तत्वों से भरा हुआ पानी लगातार पौधों की जड़ों में नहीं भेजा जाता है। इसके बजाय इन पौधों की सिंचाई एक साइकल्स के आधार पर होती है। दिन के उजाले के हर दो घंटे में एक 15 मिनट का साइकिल चलाया जाता है। अतः एक दिन में पौधों को लगभग 9-16 साइकिल में  सिंचाई की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि जब पानी नहीं दिया जाता, उतने समय में पौधों को सांस लेने और ऑक्सीजन देने के लिए समय मिलता है।

हाइड्रोपोनिक खेती के लिए बनाए बिज़नेस प्लान (Creating a Business Plan)

हर स्टार्टअप के लिए एक बिजनेस प्लान बनाना जरूरी होता है। हाइड्रोपोनिक्स जैसे कृषि सेटअप के साथ भी बिजनेस प्लान बनाना बहुत जरूरी हो जाता है। यदि आप हाइड्रोपोनिक्स खेती करने के लिए बिजनेस लोन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो आपके पास एक विस्तृत बिजनेस प्लान होना बहुत जरूरी है।

मार्केट रिसर्च

बाजार के बारे में रिसर्च करना अपने लक्ष्य को पाने के लिए सबसे पहला कदम होता है।  इस रिसर्च के द्वारा आप अपने लक्षित जनसांख्यिकीय आधार और उद्योग को आसानी से समझ सकते हैं। लेट्यूस या मिर्च जैसी सामान्य  सब्जियों की आपके आसपास के क्षेत्र में मांग है भी या नहीं। इस बारे में में जानकारी मिल जाएगी। इसलिए, संभावित ग्राहकों की तलाश करना और उद्योग की प्रवृत्ति के बारे में रिसर्च करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रशिक्षण

हाइड्रोपोनिक खेती  एक आधुनिक और नया तरीका है। इसमें कई कारक यह निर्धारित करते हैं, कि आपके द्वारा की जा रही खेती कितनी सही तरीके से फसल उगा रही है। हाइड्रोपोनिक्स खेती पानी के निरंतर प्रवाह और स्थिर तापमान की स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए आपकी एक छोटी सी गलती पूरी फसल को खतरे में डाल सकती है। यदि आप किसी जगह से हाइड्रोपोनिक्स खेती का सर्टिफिकेट कोर्स कर लेते हैं, तो न केवल इसकी बारीकियां समझ आएगी। बल्कि आप फसल के होने वाले नुकसान से भी बचे रहेंगे। इसके साथ ही आप अपने सर्टिफिकेट को व्यावसायिक योजना में योग्यता के रूप में भी शामिल कर सकते हैं।

फसल का चयन और जमीन की जरूरत

अगला कदम जो आपको उठाना चाहिए वह है अपनी फसल के रूप में आप क्या उगने वाले हैं, उसको अंतिम रूप देना। हाइड्रोपोनिक्स में उगाया जाने वाला सबसे लोकप्रिय पौधा लेट्यूस है। आप किस मात्रा में यह फसल उगाने वाले हैं, आपकी फसलों की कितनी पंक्तियां होगी। उसी संख्या के आधार पर हमें जमीन की जरूरत होगी। इस हिसाब से आवश्यक क्षेत्र की गणना करें। इससे आपको फसल उगाने के लिए आवश्यक जमीन का एक मोटा अनुमान मिल जाएगा। उसके आधार पर, आप हाइड्रोपोनिक खेती के लिए जगह किराए पर ले सकते हैं, या फिर खरीद सकते हैं।

मशीनों की जरूरत

हाइड्रोपोनिक सिस्टम कई प्रकार के होते हैं और प्रत्येक सिस्टम की अपनी विशेष जरूरते होती है। हालांकि, हाइड्रोपोनिक फार्म स्थापित करने के लिए कुछ ख़ास उपकरण या सामग्री की जरूरत होती हैं। जो इस प्रकार है:

1.   एक तापमान नियंत्रित ग्रीन हाउस या इनडोर वाली जगह

2.   पावर बैकअप

3.   पौधों के माध्यम से पानी देने के लिए जल चैनलों का एक बंद लूप फ्रेम

4.   पानी के टैंक

5.   हाइड्रोपोनिक्स के लिए पोषक तत्व का घोल

6.   ग्रो लाइट

एक बिज़नेस प्लान बनाए

एक बार जब आप अपना व्यवसाय किसी नाम पंजीकृत कर लेते हैं,  बाजार का सर्वेक्षण कर लेते हैं, और प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लेते हैं, तो आप अपनी व्यवसाय योजना बनाना शुरू कर सकते हैं। आपके बिज़नेस प्लान में सबसे महत्वपूर्ण कारक है लागत। मतलब इस बिज़नेस को शुरू करने के लिए कितना खर्चा आएगा। इस बात को भी शामिल करें। लागत में आप व्यापार शुरू करने से लेकर इसे चलाने के लिए जितना खर्च होगा। उसका अनुमान लगाए। इसके बाद उत्पाद की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और आरओआई रणनीति को फॉलो करें।

हाइड्रोपोनिक्स के लिए सर्वश्रेष्ठ पौधे (Best plants for hydroponics)

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का उपयोग करके लगभग सभी प्रकार की फसलें उगाई जा सकती हैं। जिसमें आलू से लेकर जामुन तक और बड़ी लताओं वाली फसलों को भी उगाना संभव है। हालांकि, भारत में, हाइड्रोपोनिक तकनीक के द्वारा उगाई जाने वाली कुछ सबसे लोकप्रिय फसलों के विकल्प इस प्रकार हैं:

1.   सलाद के पत्ते

2.   चेरी टमाटर

3.   मिर्च/शिमला मिर्च

4.   स्ट्रॉबेरी

5.   गोभी

6.   तुलसी

7.   ब्लू बैरीज़

8.   पत्ता गोभी

9.   फूल

10.   औषधीय जड़ी बूटियाँ

प्रशिक्षण और संसाधन (Training & Resources)

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, हाइड्रोपोनिक्स में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। नीचे कुछ संसाधन दिए गए हैं जो हाइड्रोपोनिक्स में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने में आपकी मदद करेंगे:

पुस्तकें (Books)

एंडी जैकबसन द्वारा लिखित हाइड्रोपोनिक्स एसेंशियल गाइड (Hydroponics Essential Guide)।

कीथ एफ रॉबर्टो द्वारा लिखित  हाउ टू हाइड्रोपोनिक्स (How to Hydroponics )।

हावर्ड एम रेशो द्वारा लिखित हाइड्रोपोनिक टमाटर (Hydroponic Tomatoes)।

पाठ्यक्रम (Courses)

1.   हाइड्रोपोनिक्स लैब रिसर्च फाउंडेशन – ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम

2.   हाइड्रिला कार्यशालाएं

3.   सिटीग्रीन्स प्रशिक्षण

4.   सीवी हाइड्रो

5.   बेलेसिरी

विशेषज्ञ और सलाहकार ( Experts & Consultants)

1.   हाइड्रिला

2.   किसान मित्र

3.   बेलेसिरी

4.   उदय हाइड्रोपोनिक्स

5.   ब्रियो हाइड्रोपोनिक्स

6.   एक्वा फार्म

निष्कर्ष (Conclusion)

हाइड्रोपोनिक्स आने वाले समय में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली कृषि तकनीक है। इस तकनीक से आप खेत को पूरी तरह से स्वचालित भी कर सकते हैं। यह  करना संभव है। आटोमेटिक पोषक तत्व सलूशन डिस्पेंसर, टाइमर, तापमान नियंत्रण इकाइयों आदि का उपयोग करके आप पूरे खेत को एक केंद्रीय कंप्यूटर से चला सकते हैं। हालांकि, इसमें लगने वाली ज्यादा लागत से घबराएं नहीं। आप चाहे तो छोटे रूप से भी इसे शुरू करके धीरे-धीरे बड़ा कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए इस कहानी को पढ़े । कॉलेज खत्म होते ही तिरुपति के रहने वाले इस युवा ने हाइड्रोपोनिक खेती शुरू करके 54 हजार रुपये प्रति महिना कमाना शुरू कर दिया। आज उनका स्टार्टअप ‘व्यवसायी भूमि’ अच्छी खासी कमाई कर रहा है।

ऐसी उन्नत पद्धति के कई लाभ हैं। चूंकि इस तकनीक से उगाई गई फसल की उपज जैविक और उच्च गुणवत्ता वाली होती है। इस वजह से इससे लाभ भी ज्यादा होता है। अतः आप कह सकते हैं, कि आगे आने वाले समय में इस कृषि प्रणाली के उद्योग का भविष्य सुरक्षित है।

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