मछली पालन व्यवसाय: अधिक लाभ कमाने के लिए इस प्रकार बनाएं बिज़नेस प्लान

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परिचय ( Introduction )

आपको क्या लगता है कि ज्यादातर मछलियां कहाँ से लाई जाती है? समुद्र, नदियां और झरने से गलत। यह सोच आपकी कुछ हद तक सही है। वैसे जितनी मछलियां हमें समुद्र, नदी और झरने से मिलती है, उससे कहीं अधिक मछलियां फिश फार्म से लाई जाती है। मछली पालन से मछली का  उत्पादन 10.5 लाख टन तक होता है। जिसका बाजार मूल्य 33,442 करोड़ है। मछली और मछली से बने हुए उत्पाद भारत से दूसरे देशो में बहुत बड़ी मात्रा में भेजे जाते हैं। यह  कृषि के क्षेत्र में दूसरे देशो में भेजा जाने वाला सबसे बड़ा समूह है।

दुनिया भर के 75 अलग – अलग देशों में मछली और शंख कि 50 से ज्यादा किस्मों को निर्यात किया जाता है। यह देश के कुल निर्यात का लगभग 10 प्रतिशत और कृषि निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत है। भारत में किया जाने वाला मछली पालन और जलीय एक बहुत ही जरूरी खाद्य – उत्पादक व्यवसाय है, जो ज्यादा मात्रा में पोषक तत्व प्रदान करता है।

भारत में मछली पालन के लिए अनुकूल जलवायु और भूमि पाई जाती है, यहां पर 7500 किलोमीटर की तटरेखा और बहुत से पानी के संसाधन है, जैसे कि दलदल, नदी, और तालाब। भारत सबसे ज्यादा समुद्री खाद्य उत्पादन करने वाले पांच देशों में से एक है। यही वजह है कि समुद्री खाद्य उत्पादन तेज गति से आगे बढ़ रहा है। 60% तक की जनसंख्या मछलियों और मछलियों से बने उत्पाद का इस्तेमाल करती है। यही वजह है कि यह बेशक मछली पालन एक बहुत ही लाभदायक व्यवसाय है। एक अच्छी तरह से रखरखाव वाला मछली पालन वाला आपको बहुत ज्यादा लाभ दे सकता  है। चलिए इस लेख में हम जानते हैं, मछली पालन व्यवसाय किस तरह से किया जाए कि हमें अधिक लाभ हो।

मछली पालन क्या है? (What is pisciculture?)

मछली पालन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मछलियों कि संख्या को बढ़ाने के लिए इन्हें सिमित टैंक में रखा जाता है। इसे ही मछली पालन कहते है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो दूसरे देश में भेजे जाने वाली वस्तुओं और खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि करता है। आजकल मछली को मुख्य भोजन के रूप मे खाया जा रहा है, इसलिए इसका उत्पादन भी बढ़ता जा रहा है। मछलीयों को ज्यादा पकड़े जाने से इनकी प्रजाति मे कमी आ रही है।

मछली पालन बनाम जलीय खाद्य पालन (Pisci culture vs Aquaculture)

मछली पालन मुख्य रूप से मछली से बनी हुई वस्तुओं से सम्बन्धित होता है, जो की खाने के रूप मे इस्तेमाल किया जाता है। इनको तालाबों या पानी के बड़े टैंक मे पाला जाता है। मछलियों का पालन आमतौर पर तालाब, जलाशय, या पानी के बड़े टैंक में किया जाता है। मछली पालन के लिए धान के खेतों का भी इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

एक्वाकल्चर ( पानी में खेती ) की एक तकनीक है। इस तकनीक में मछलियों का पालन, शंख, शैवाल, और बहुत सारे जीव शामिल होते है। इन सभी जलीय जीवों का विकास पानी में होता है।

एक्वाकल्चर एक ऐसा तरीका है, जिससे खाने की चीजें पैदा होती है। इसके साथ ही और भी कई चीजें पैदा की जाती है। जिन्हें  बेच कर पैसा कमाया जाता है।  एक्वाकल्चर का एक मुख्य उद्देश्य यह भी है, कि इससे जीवों की रहने की जगह बची रहे, इन्हें विलुप्त होने से बचाया जा सके। मछली पालन में सिर्फ मछली और मछली से बनने वाले उत्पादों पर ध्यान दिया जाता है, जबकी जलीय खाद पालन में जल में रहने वाले पेड़ – पौधों और प्राणियों के जीवन पर भी ध्यान दिया जाता है।

भारत में फिशिंग उद्योग  ( The fishing industry in India )

संयुक्त राष्ट्र फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार मछली पालन के काम से 14 लाख लोगों को रोजगार मिला है।

विश्व के मछली उत्पादन का लगभग 6।3 प्रतिशत उत्पादन भारत में होता है।

हालाँकि, यह देखते हुए कि विकास लक्ष्यों में से एक जलीय संतुलन में सुधार करना है, भारत को 100% स्थायी मछली पकड़ने की तकनीक लागू करने वाला देश बनने से पहले एक लंबा रास्ता तय करना है। लंबे समय से, जलीय पर्यावरण और मछली पकड़ने वाले समुदायों (विशेषकर महाराष्ट्र और तमिलनाडु में) को अत्यधिक मछली पकड़ने और मछली पकड़ने की अस्थिर तकनीक जैसे ट्रॉलिंग (जो जलीय जीवन को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं) के परिणामस्वरूप नुकसान उठाना पड़ा है। बहुत ही ज्यादा अनियमित और अनौपचारिक आपूर्ति श्रृंखला के साथ, मछली पकड़ने के सारे नियम समुदाय पर छोड़ दिये जाते हैं, ताकि, थोड़ा जोर देकर उन्हे लागु किया जा सके।

भारत के समुद्री मत्स्य पालन विनियमन अधिनियम में के तहत कुछ नियम बनाए गये है। “कुछ मछली पकड़ने के गियर पर प्रतिबंध लगाया गया है। जाल के आकार पर भी नियम है। किस मौसम में और क्षेत्रों में मछली को नहीं पकड़ सकते। यह भी नियम इस अधिनियम के अंतर्गत आता है।  इसके साथ ही बिना ट्रॉलिंग के क्षेत्रों का सीमांकन के, अन्य उपायों के अलावा जैसे कछुआ बहीष्करण उपकरणों ( ऐसा उपकरण या जाल जिसमे केवल मछलियां फंसे कछुएँ नही ), और नो – फिशिंग एरियाज़”, ( ऐसे क्षेत्र जहां मछली पकड़ना मना है ) के नियमों को बनाया गया है। लेकिन इन नियमों को कोई भी सही तरीके से पालन नहीं करता है। इनमे से ज्यादातर बातें अनियमित है। जिनका कोई पालन नहीं करता है।

मछली पालन व्यवसाय के लिए बिज़नेस प्लान  (Creating a Business Plan for your Fish Business)

कार्यकारी सारांश ( Executive summary )

मछली पालन का क्षेत्र बढ़ रहा है, और इसमे निवेश कि बहुत सारी संभावनाएं हैं। इस व्यवसाय ने ज्यादातर उद्यमियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा हुआ है, और इस व्यवसाय कि सफल शुरुआत के लिए एक सक्षम मछली पालन व्यवसायिक योजना बनाने की जरूरत है। मछली पालन व्यवसाय योजना का कार्यकारी सारांश पूरी योजना के बारे में बताता है।  यह मछली पालन व्यवसाय में कार्यकारी सारांश एक महत्वपूर्ण भाग है, इस हिस्से की तरफ निवेशक सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं।

बाजार विश्लेषण ( Market Analysis )

मछली पालन व्यवसाय की शुरुआत करने से पहले, आपको व्यवहार्यता अध्ययन यानी की ऐसी पढ़ाई जिससे अच्छा व्यवहार करके बाजार में अपने काम को बढ़ाया जा सकता है, करना चाहीए। इसके बाद ही व्यवसाय की एक मजबूत योजना बनानी चाहीए। एक फिश फार्म शुरु करने से पहले, आपको पूरे बाजार का विश्लेषण करना चाहीए।

आपको जरूरत है कि आप अपने क्षेत्र के बाजार की मांग को समझें।

यदि आप निर्यात के लिए मछली पालन योजना शुरू करना चाहते हैं, तो आपको पहले मछली प्रसंस्करण कंपनियों से बात करनी चाहीए। आप अपने इस व्यवसाय के लिए एक बैकअप मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाये, जिसमे आपको यदि कभी घाटा होता है, तो बैकअप से उसकी पूर्ति की जा सके।

मत्स्य पालन के लिए दक्षता ( Skills of Fish Farming )

एक मछली पालन फर्म चलाने के लिए या शुरु करने के लिए, आपमें कुछ प्रतिभाएं और योग्यताएं भी होनी चाहीए। वैसे तो सरकार द्वारा मछली पालन का  प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा ऐसे भी कई फर्म हैं, जो आपको मछली पालन का प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

सफल मछली पालन व्यवसाय चलाने के लिए आपको प्रशिक्षण केंद्र में पानी की गुणवत्ता को कैसे बनाये रखे, बीमारियों पर कैसे नियंत्रण रखें, मछलियों का खाना कैसा होना चाहिए, किस समय पर होना चाहिए , बाजार और बाजार में बेचने के लिए तैयार की गई मछली कौन सी होनी चाहीए। इन सब को सीखना होगा।

·         आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपके पास साफ़ पानी कि सप्लाई लगातार होती रहे।

·         यह भी जाँच करे, की आप जिस मछली की प्रजाति पालने वाले है, उसके लिए पानी का तापमान उपयुक्त है या नही। इसके साथ ही आपको यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जिस तालाब में मछलियों को पाला जाना है, उसमे मछलियाँ आसानी से रह सके, उनको भोजन भी पर्याप्त मात्रा में मिले, इसके साथ ही उनकी उत्पादकता भी बड़े।

·         जिस पानी में आप मछली पालन शुरू करना चाहते हैं, आपको उस पानी कि रासायनिक जाँच और बैक्टीरिया की भी जांच करवानी चाहिए।

·         आपको आजकल के नये और आधुनिक तकनीको का उपयोग करके जोखिम का मूल्यांकन भी कम करना चाहीए। आपको यह समझना चाहिए कि आपके व्यवसाय में कब और किस समय क्या स्थिति बनेगी और इसके साथ – साथ आपको जोखिम प्रबंधन करना भी आना चाहीए।

मछली पालन में यह बहुत जरूरी कि आप ऐसे सप्लाई करने वालो को ढूंढे, जो आपको मछली के अंडे, मछली के छोटे बच्चों और मछली के खाने की सप्लाई नियमित और उच्च गुणवत्ता वाली कर सके।

मछली पालन के लिए सही जगह का चुनाव ( Choose the Right Location )

मछली पालन के लिए यह बहुत जरूरी है, कि पानी का बहाव लगातार होता रहे। अगर आप मछली पालन का काम एक समुदाय में शुरू करना चाहते हैं, तो आपको ऐसे तालाब को ढूंढने की जरूरत है, जिसमे अच्छे पानी का स्रोत हो। यदि आप मछली पालन का व्यवसाय शहर में शुरू कर रहे है तो आप यह सुनिश्चित करें की म्युनिसिपेलिटी की तरफ से पानी की सप्लाई मिलती रहे।

मछली पालन व्यवसाय शुरू करने की लागत ( Cost of Starting Fish Farming Business )

मछली पालन व्यवसाय में, दो तरह से आर्थिक निवेश होता है । पहले तरह के निवेश में निश्चित पूंजी लागत होती है।  दूसरी तरह के निवेश में वो पूंजी आती है, जो व्यवसाय को चलाने के लिए चाहिए होती है।

 भूमि और भवन का खर्चा, मछलियों को पालने के लिए बनाये गये तालाब, परिवहन के लिए ट्रक, पाइप लाइन की व्यवस्था, टैंक और ऑक्सीजन को नापने के मीटर, यह सभी खर्चा फिक्स्ड कैपिटल कॉस्ट में शामिल होता है।

अंडो और मछली के बच्चों, मछली का खाना, बिजली, पेट्रोल, श्रम, रसायन, दवाएं, कर, बीमा, फोन, परिवहन, और दूसरे  रख – रखाव के खर्च, ये सभी खर्च व्यवसाय को चलाने वाले खर्चों में शामिल होते हैं।

उद्योग शुरु करने से पहले आप जिस प्रजाति की मछली से सम्बन्धित मछली पालन का व्यवसाय शुरु करना चाहते हैं। आपको उसके लिए एक सटीक लागत मूल्यांकन तैयार करना चाहीए। क्योकिं इन मछलियों की गणना में उतार – चढ़ाव भी हो सकता है। आपने मछली व्यवसाय में उत्पादन का जो लक्ष्य बनाया है। उस पर विचार करना चाहीए। इसके साथ ही आपके व्यवसाय के लिए कितनी जगह की जरूरत जरूरत है। इस बात को भी ध्यान रखें।

जरूरतें ( Requirements )

मछली के लिए खाना ( Feeds for fish )

आपको यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है, कि मछली पुरी तरह से प्रजनन करने के लिए अपने पूरे जीवन के विकास चक्र को पूरा करने के लिए जीवित रहे। इसके साथ ही यह भी बहुत जरूरी है कि मछलियाँ प्राकृतिक रूप से प्रजनन करें।

 सैलमन और दूसरी मांसाहारी मछलियां, अन्य मछलियों को खा जाती है। मछली का तेल, प्रोटीन, पौधों से मिला हुआ प्रोटीन, मिनरल, और विटामिन, यह सभी मांसाहारी और शाकाहारी मछलियों के खाने में शामिल होता है। इन सब से ही मछलियों को सबसे ज्यादा पोषक तत्व मिलते हैं। यही वजह है कि मछली खाने वाले लोगों को भी स्वास्थ्य के काफी फायदे मिलते हैं।

किस तरह की मछलियों का पालन शुरू करना चाहिए ?

मछली पालन व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे पहला और जरूरी पहलू यह है कि हमें पाली जाने वाली मछलियों की नस्ल पता हो। सही नस्ल का चुनाव हमारे व्यवसाय को बहुत आगे तक ले जाता है। एक बात का ध्यान रखें। हर प्रजाति की मछलियां फार्म में नहीं पाली जा सकती।

कैटफिश, तिलापिया, सैलमन, कार्प, कोड, और ट्रॉट ये सभी सामान्य तौर पर मछली पालन में प्रयोग की जाती है। मछली पालन के लिए कल्चर सिस्टम होता है, मैरीकल्चर मुख्य रूप से मानव उपयोग में आने वाली खेती से सम्बन्धित है।

फार्म मशीनीकरण के लिए आवेदन पत्र ( Farm Mechanisation Application form )

फार्म में मशीनीकरण इसलिए कराया जाता है, ताकि फार्म के काम के लिए इंसानो की जगह मशीनें उस काम को कर सकें। ऐसा करने से हमें कम मजदूरों की जरूरत होती है। फार्म के मशीनीकरण के लिए एक आवेदन पत्र उसी व्यक्ति के द्वारा बनाया जाना चाहिए, जो मछली पालन का उद्यम शुरू करना चाहता हो। मछली पालन व्यवसाय को शुरू करने के लिए निम्नलिखित कागजातों की जरूरत आवेदन करने के लिए होती है।

1.    मछली पालन आवेदन पत्र। (Fish farming application form)

2.    सीफूड फार्मिंग सेक्टर के लिए एमएओ योजना। (Plan from MAO for the seafood farming sector)

3.    दस्तावेज़ जिन्हें प्रूफरीड किया गया हो। (Documents that have been proofread)

4.    मछली पालन शुरू करने वाले व्यक्ति की तस्वीर। (Picture of a person)

5.    व्यक्ति की पहचान का सबूत। (Evidence of a person’s identity)

मछली पालन व्यवसाय के लिए मछली के प्रकार का चुनाव ( Choose the Type of Fisheries for farming )

भारत मछलियों की कई प्रकार की प्रजातियों का उत्पादन करता है। जिनमें लगभग 1,570 फिनफिश और 1,000 शैलफिश की प्रजातियां है। भारत ने आजाद होने के बाद मछली पालन व्यवसाय में बहुत शानदार वृद्धि की है।

भारत में मछली पालन के मुख्य प्रकार नीचे लिखे हुए है:

1.    समुद्री मत्स्य-उद्योग (Marine Fisheries): यह मछली पालन, कुल सालाना मछली उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करता है। यह पश्चिम में कच्छ, मालाबार तट से पूर्व में कोरोमंडल तट तक, तटीय क्षेत्रो तक सीमित है। महाद्वीप के समतल के पतले बेल्ट और 5,600 किलोमीटर तक फैले ढलान पर लगभग 2,81,600 वर्ग किलोमीटर का कुल क्षेत्र मछली पकड़ने योग्य है।

2.    मीठे पानी या अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Freshwater or Inland Fishery): इस प्रकार का मत्स्य पालन नदियों, नहरों, सिंचाई चैनल, टैंक, तालाब, और झरनों या ऐसी ही किसी दूसरी जगह पर किया जाता है। मीठे पानी में किया जा रहा मछली पालन देश के कुल समुद्री खाद्य उत्पादन का 60 प्रतिशत से भी ज्यादा है। हाल ही में ये पता चला है, अब समुद्री मछलियों को पकड़ने से ज्यादा मीठे पानी कि मछलियों को पकड़ा जा रहा है, मीठे पानी कि मछलियों कि उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई है। ताजे पानी में मछली पालन को दो प्रकार में बाँट सकते हैं।

3.    जल स्त्रोतों के मुहाने में मछली पालन (Estuarine Fisheries): इस वर्ग में जल स्त्रोत के मुहाने,  ज्वार – भाटा, खाड़ी, जलमग्न बाढ़ – क्षेत्र, और समुद्र तट के सभी दलदल आते हैं। इसके साथ ही कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, गंगा, महानदी, गोदावरी, तापी, चिल्का की नमकीन झीलें, पुलिकट और केरल के बैकवाटर के स्त्रोत भी शामिल है। भारतीय संस्कृति में एक विशेष प्रकार का झींगा बहुत ही मशहूर है जो सफेद झींगा ( पेनियस इंडिकस ) कहलाता है। टाइगर झींगा यह भारतीय संस्कृति में एक उपयुक्त प्रजाति है।

4.    मोती की खेती (Pearl Fisheries): ऐसे क्षेत्र अक्सर, लकीरो, चट्टानों, या मरे हुए मूंगो पर पाए जाते हैं, जो 18 से 22 मीटर कि गहराई पर एक बहुत बड़ा मोती बैंक बनाते हैं। किनारे से इसकी दूरी लगभग 20 किलोमीटर होती है। मोती कि सीप से बहुत कीमती मोती निकाले जाते हैं। मन्नार का गल्फ, कच्छ का गल्फ, पल्क कि खाड़ी और अंडमान और निकोबार द्वीप यह सभी मोती मत्स्य पालन के मुख्य केंद्र है। यह सब सरकार के अधीन आते हैं।

उपकरण ( Equipment )

प्राकृतिक या प्लास्टिक पोंड – जब आप मत्स्य पालन शुरु करने के बारे में सोचे तो यह बहुत जरूरी वस्तु है, जिसकी आपको जरूरत होगी।  आप इसे एक बड़े आकार के फिश टैंक की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। यह उन लोगों के लिए उययुक्त है, जो मत्स्य पालन शुरु करना चाहते हैं। वह एक छोटे से कमरे में इसे टैंक की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इसे छत्त पर या जमीन पर भी लगा सकते हैं। आप एक कृत्रिम तालाब का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जो की आजकल बाजार में उपलब्ध है। इसे लेने में कितना खर्च आएगा, यह इस बात पर निर्भर करता है की आप कैसी गुणवत्ता और आकार का कृत्रिम तालाब ले रहे हैं।

लाइसेंस ( Licenses )

एक मछली पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की कुछ महत्वपूर्ण और आवश्यक शर्तें हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है:

1.       उस जगह को पहचाने जहां आप मछली पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।

2.       योजना का विकास, योजना के कागज और जिनमे व्यवसाय का मोटा अनुमान लगाया है, वो कागज सहीत, साथ ही बैंक के द्वारा लिए गए कर्ज की कागजी कार्यवाही. यदि आपने भूमि गिरवी रखी है। सब को सम्हाल कर रखें।

3.       मछली पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए आपको इस क्षेत्र में ट्रेनिंग लेने की जरूरत है।

4.       अंदर और बाहर की जगह का अनुमान लगाकर पर्याप्त मात्रा में तालाबों को लगाना चाहीए।

5.       लिमिंग, प्लवक ब्लूम, खाद, पानी भरना, बीज भंडारण, और स्टॉकिंग भंडारण जैसे प्रशासन के पहलुओं को शामिल करें।

6.       मिट्टी और पानी से सम्बन्धित दस्तावेजीकरण प्रदान करें। मतलब आपको मिट्टी और पानी से सम्बन्धित सारी जानकारी देनी होगी।

7.       हमें चयनात्मक कटाई और निशान स्क्रीनिंग को भी सुनिश्चित करना होगा।

8.       हमें मछलियों के पोषक तत्व और मछली पालन व्यवसाय के प्रशासनिक व्यवस्था पर ध्यान देना होगा।

9.       हमें अपने मछली पालन व्यवसाय को बेहतर बनाने के लिए नई और अच्छी रणनीतियों पर काम करना होगा।

10.   मछली पालन से जुड़े सभी खर्चों का ध्यान रखना होगा, उनकी जानकारी देनी होगी।

वाणिज्यिक विश्लेषण ( Financial Analysis  )

यह व्यवसाय एक छोटे से निवेश से भी शुरू किया जा सकता है, जिसके अंतर्गत 30 से 50 हजार की लागत आती है। आपको इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए मछलियों के खाने, बिजली, पानी और अंडों के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना होगा। यह खर्च 1 से 2 लाख के बीच का हो सकता है। आपको इस व्यवसाय की शुरुआत में 2 लाख से ज्यादा का निवेश करना होगा। यदि आप इस व्यवसाय में 1 लाख की पूंजी लगाते हैं, तो आप 3 लाख से भी ज्यादा का मुनाफा कमाने की संभावना रखते हैं। आपका यह व्यवसाय विनिर्माण, विज्ञापन, और ऐसी दूसरी प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।

आप इस बात का ध्यान रखे की आपके पास एक उचित मात्रा में लगाने के लिए धनराशि हो।  जिससे आप अपने व्यवसाय को बाजार में ला सके और बाजार से सम्बन्धित दूसरे काम कर सके।  अपने व्यवसाय का प्रचार – प्रसार कर सके। यह सभी काम एक शुरूआती व्यवसाय को चलाने के लिए और आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में मछली पालन व्यवसाय के लिए तकनीक ( Fish Farming Technology in India )

चेन्नई में द फिशरीज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड ट्रेनिंग ( FIIT ) की स्थापना टाटा समूह के साथ मिलकर की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य वहां के मछुआरों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है । यह एकीकृत मात्स्यिकी परियोजना इसलिए बनायी गयी, ताकि विशेष प्रकार की मछलियों की प्रक्रियाओं में नई खोज की जा सके। इनकी संख्या को बढ़ाया जा सके, और इससे व्यवसाय के रूप में प्रयोग किया जा सके। आज के समय में 19 राज्य ऐसे है जो फिशरीज इंस्टिट्यूट चला रहे है।

भारत की प्रमुख मछलीयों की कार्प प्रजातियों के साथ कैटफिश, मुरल, और झींगे जैसी दूसरी किस्मों को हाल ही में भारत की प्रजनन और कल्चरल टेक्नोलॉजी में जोड़ा गया है। यह एक  ऐसी तकनीक है जिसमे मछलियों पर विशेष रूप से कैटला, मृगल और रोहू पर  प्रयोग किये जाते हैं।

मछली पालन असफल क्यों होता है? ( Why do Fisheries Fail? )

भले ही भारत में बहुत बड़े – बड़े जल स्त्रोत हैं, और यहाँ पर वनस्पतियों और फूलों की बहुत अलग – अलग विदेशी प्रजातियाँ है। भारत कई अन्य देशों की तुलना में कम कृषि उत्पादकता और लाभप्रदता का गवाह है।

मछली पालन असफल होने के क्या कारण हैं?

1.    गैर – वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Non-scientific Approach)

2.    जागरूकता की कमी (Lack of awareness)

3.    नई तकनीक और नए तरीकों को नजरअंदाज (Ignorance of technology and new ways)

4.    निम्न-गुणवत्ता वाला फीडस्टॉक (Inferior-quality feedstock)

5.    अपर्याप्त प्रबंधन (Inadequate Management)

याद रखने योग्य मुख्य बातें ( Points to Remember )

1.    आपके व्यवसाय को बड़े पैमाने पर आने के लिए छोटे रूप में शुरुआत करनी होगी। हर सफलता की शुरुआत छोटे कदमो से होती है।

2.    आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि आपके पास अलग – अलग तरह के सीफूड हो और उससे सम्बन्धित कई तरह की वस्तुएँ हो, जिससे आपकी बिक्री बढ़ेगी।

3.    आप इस काम की शुरुआत घर से भी कर सकते है। एक छोटा सा प्लास्टिक का टब या टैंक खरीद कर। घर में कहीं पर भी लगाया जा सकता है, चाहे वो आपका छत्त हो या फिर कोई बंद जगह। मछली से आने वाली महक के कारण आपको सोसाइटी से NOC लेना होगा। आपको मछली के भोजन और उसकी दवाइयों के लिए खर्च करना होगा। आपको ये गारंटी भी देनी होगी कि आप नियमित रूप से पानी की सफाई करेंगे।

मछली पालन से जुड़े संसाधन ( Fishing Related Resources )

कोर्स  (Courses)

·         यूअडेमी (Udemy)

·         एक्सड एजुकेशन   (ACSD Education)

·         आई सी ए आर ( ICAR)

किताबें ( Books )

·         मत्स्य पालन और मात्स्यिकी उत्पादों की हैंड बुक (Hand Book of Fish Farming & Fishery Products)।

·         बायोफ्लॉक् टेक्नोलॉजी – एक प्रैक्टिकल गाइडबुक (Biofloc Technology – A Practical Guidebook)

·         द फ्रेश वाटर एक्वाकल्चर बुक (The Freshwater Aquaculture Book)

विशेषज्ञ ( Experts )

·         फिश फार्मिंग एक्सपर्ट (Fish Farming Expert)

·         इंडिया मार्ट एक्वाकल्चर कंसल्टेंसी (India Mart Aqua Culture Consultancy)

·         किसान मित्र (Kisaan Mittr)

निष्कर्ष ( Conclusion )

रचनात्मक तरीके से मछली पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए आपके पास बहुत ज्यादा ग्राहक होंगे। आपने गौर किया होगा की जहां कहीं भी मछली बेची जाती है, वहां पर बहुत सारी दुकानें एक लाइन में होती है, और इस जगह से बहुत बुरी बदबू आती है। यहां पर भीड़ पर भी कोई नियंत्रण नही होता है। इसके अलावा गुणवत्ता की भी कोई गारंटी नही होती है। यदि कोई व्यक्ति सही तरीके से मछली पालन व्यवसाय करके इसे चलाता है तो उसके पास आसानी से एक बड़ा ग्राहकों का आधार हो सकता है और शायद ज्यादा बिक्री भी हो और राजस्व भी मिले। लिसियस, सभी प्रकार के मांस को बेचने का काम कर रहा है, इस प्रकार के व्यवसाय का यह एक बहुत अच्छा उदाहरण है।

जब आप अपनी कंपनी की रणनीति के साथ यहां दी गई जानकारी को साथ में रखकर एनालिसिस करते हैं, तो आप अपने मछली पालन व्यवसाय से बहुत ज्यादा लाभ कमा सकते हैं।  आप इन सबका उपयोग अपनी मार्केटिंग को आगे बढ़ाने के लिए भी कर सकते हैं। आप अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए अपने आस – पास फ्लाइर्स का उपयोग करें। इसके साथ ही ट्विटर, फेसबुक, लिंकेडिन जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग शुरू करे।

This post is also available in: English हिन्दी

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